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सब जगह तुझको निहारता हूँ...

खोजता हूँ उसे सब जगह..

लेता हूँ उसका नाम दिल से आँखों से आंसू आ जाते है ........
क्या करूँ मजबूर हूँ..आंसू में भी वो पा जाते है ..
निहारता हूँ तुझे सब जगह,,,,,
१.न मिलना हो तो पहले कह देना ठाकुर, अक्सर बारिश से पहले "तारे" भी छुप जाते है ... निहारता हूँ उसे सब जगह...
२.मुझे इस क़द्र न तडफाया करो... रोज मेरे सपनों में आया करो.... बाते होंगी तुमसे दिल कि..यु न अपने चहरे को छुपाया करो.... निहारता हूँ तुझे सब जगह...
३.मेरे नजरो में तेरा सलोना रूप है... होठो पे बस तेरा नाम है..... ये असम..ये जमीं हिल जाएगी... .तुम न ए तो मेरी जान चली जाएगी..... निहारता हूँ तुझे सब जगह...........
४.अम्बर से फलक मिलाये नही जाते .....
जुदाई के दिन काटे..काटे नही जाते ....
तेरी यद् में आंसू रोके..रोके नही जाते...
(प्यारे सच कहू) आग लगा के बुझाई नही जाती....
तेरी याद भुलाये ..भुलाई नही जाती....
हर श्वास में है तेरी याद...
हर धड़कन में है तेरी याद...
हर धड़कन  में लेता हूँ तेरा नाम....
.प्रेम की राह पे हूँ.......
निहारता हूँ तुझे सब जगह............



मैंने  ठाकुर जी की कृपा से अपनी टूटी फूटी भाषा में कुछ लिखने का प्रयास किया है ये भाव मै ठाकुर जी को और मेरे गुरु  को समर्पित करता हूँ |  







 1.
जिंदगी में हमें जिंदगी भर गम मिले,
जब जन्मे तब रोते हुए गम मिले,
जवानी में "जवानी" के गम मिले,
बुढ़ापे में बीमारी के गम मिले,
(अब तुम न आये तो प्यारे)
तेरी जुदाई  के गम कम न मिले
(प्यारे!अब तेरी जुदाई के गम कभी न  मिले)

2. 
मंजिल तक पहुचना है , खाई को पर करना होगा,
गुलाब को लेना है,काँटों को झेलना होगा,
सुख को पाना है,कर्म करना होगा,
"अर्थ" को पाना है , कड़ा परिश्रम करना होगा,
प्रभु को पाना है,उनकी कथा को गाना होगा,
बाँके बिहारी को पाना है.....राधा रानी का नाम गाना होगा ..........
श्री राधे  श्री राधे  श्री राधे श्री राधे श्री राधे श्री राधे श्री राधे श्री राधे श्री राधे 

3.
तुझे निहारता हूँ सब जगह, तुझे पुकारता हूँ सब जगह, आंखे बिछाये रखता हूँ कब आओगे, चरणों में आंखे लगाये रखता हूँ कैसे दूर जाओगे, दिल में बसे हो तुम,तुम में बसे है हम, कैसे अपने चरणों से दूर कर पाओगे, जो दर पे आया तेरे एक बार(तो) दूर मत करना, फिर कैसे मेरी आँखों को पाओगे .

मैंने  ठाकुर जी की कृपा से अपनी टूटी फूटी भाषा में कुछ लिखने का प्रयास किया है ये भाव मै ठाकुर जी को समर्पित करता हूँ |
1.
 हवा को चलाता है वो,
हर चेहरे पर ख़ुशी लता है वो ,
भक्तो के आंसू पुछता   है  वो,
.तिरछी चितवन से सब के मन को भाता है वो,
हर आंख का सितारा है वो,
जग का उजियारा है वो,
जो भी जाता है दर पर एक बार,झोली भर कर लाता है वो,
कृपा को बारिश में डूब जाता है वो |

2. 
उनकी नजरो ने हम को घायल कर दिया,
उनकी  चाल ने हम को दीवाना कर दिया,
जब भी सुनता हूँ उनका नाम किसी  की जुबा से....
उनकी याद ने हमारी आँखों को नम कर दिया 

3.
तेरे दर्श को नैन तरसे,श्रावण के बदरिया बरसे,
बूंद-बूंद में तुझ को निहारु , तेरी या में पल-पल गुजारु,
युग-युग हुए तुम नही आये,अब ये मन चैन नही पाए ,
तेरे दर्श की प्यारी, मै तिहारी बिहारी,
फुरसत से हम से  मिल लो, तेरे दर्श को नैन तरसे...
तेरे दर्श को नैन बरसे ...........